Poetry 1 min read 626.5K reads

मौसिकी


तेरा मौसुल मिरा मौसुलहम दोनो का किरदार है ।मैं फकत तुझ्ंमे बसातू बसा सगरे सँसार है ।।

पाना तुझे चाहत मिरीमिल सका न कोशिश करीजिद्द से भी बड़ी जिद्द अबखोज न रुके निकले जो दम

एक अबोध बालक

Read more Earn more Learn more