गुजरा साल
भीगे बाल
मन मुस्काया
चित्र बनाया
चित्र बना कर
सृजन अकोरा
आत्म ज्ञान के
शब्द बिखेरे
शब्द जो बिखरे
भाव थे निखरे
उन भावों का
सपन सजाया
तुम को देखा
उन सपनों में
गुजरा साल
भीगे बाल
मन मुस्काया
चित्र संजोया
उन चित्रों की
छाया में फिर
कविता लिख दी
उस कविता का
लिए सहारा
जीवन निकला
तुम न आईं
गुजरा साल
भीगे बाल
मन मुस्काया
चित्र बनाया ।।


