रूहानी प्रेम
ये रूहानी प्रेम नहीं है
तो और क्या है…
पल भर के लिए भी
तू दिल से जुदा नहीं होता
धक धक सा मुझमें…
हर पल तू धड़कता है
सांसों में बस कर…
संग संग तू चलता है
कभी लफ़्ज़ बन कर…
कविताओं में सजता है
कभी गीत बन कर…
अधरों पे गुनगुनाता है
अधरों से न चूम कर…
आँखों से चूमता है
इश्क़ है, प्रीत है या महज़ लगाव…
तू ज़र्रा ज़र्रा मुझमें बसता है!!
डॉ. अपर्णा प्रधान
स्वरचित, सर्वाधिकार सुरक्षित

