अजी ख़ुशी से निभ जाएँ तो,
शुक्र तेरा भगवान कहो।
मुश्किल में इंसान के रिश्ते,
देखो ये बदनाम न हो।।
दर्पण हाथ में ले कर चलते,
सब इंसानों की बस्ती में।
लाख गुनाहों की माफ़ी देते,
बैठे हैवानों की कश्ती में।
खूब कमाओ धन-दौलत सब,
रिश्ते कोई गुमनाम न हो।
मुश्किल में इंसान के रिश्ते,
देखो ये बदनाम न हो।।
मधुर-मधुर मुस्कान लवों पर,
बगल में छूरी मत रखना।
सच है कड़ुवा घूँट समझ कर,
अमृत सा इसको चखना।
चीर के सीना देखने वालो,
खुद पर ये इल्जाम न हो।
मुश्किल में इंसान के रिश्ते,
देखो ये बदनाम न हो।।
कलयुग में अब मचा समर है,
कौन किसी का अपना है।
बेटे का सहारा मिले किसी को,
आज बना एक सपना है।
बन्द हुए हैं द्वार दिलों के,
इन्हें टूटे रिश्तों के दाम कहो।
मुश्किल में इंसान के रिश्ते,
देखो ये बदनाम न हो।।
भूपेन्द्र डोंगरियाल
22/08/2018
