मुश्किलों से खिन्न मत हो,
इन्सानियत से भिन्न मत हो।
होगी जीत तेरी प्रण कर,
मनन कर तू मनन कर।

तू आज से आरम्भ कर,
शून्य से प्रारम्भ कर।
वक्त को ललकार कर कह,
जीत का नहीं दम्भ कर।
वीरता पर जश्न होगा,
जीत होगी चरण पर।
दुःख न होगा मरण पर,
मनन कर तू मनन कर।

देखकर हर राह चल तू,
भूल जा हर स्याह कल तू।
शोक के अब गीत मत गा,
अफसोस में मत हाथ मल तू।
फौलाद का सा ज़िगर रख तू,
शत्रु का फिर दमन कर।
अपने बड़ों को नमन कर।
मनन कर तू मनन कर।

ताण्डव न कर न नाश कर,
इतिहास रच कैलास पर।
हर हार से अब खार खा तू,
जीत की फिर आस कर।
भुजाएँ तो सभी की फड़कती हैं,
क्रोध का तू शमन कर,
खण्डहरों को चमन कर।
मनन कर तू मनन कर।

हार की जब हार होगी,
जीत की भरमार होगी।
छलकता आक्रोश उर से,
तब हाथ में तलवार होगी।
तकरार करता शत्रु खुद से,
खुश हुआ मति हरण पर।
होगी जीत तेरी प्रण कर,
मनन कर तू मनन कर।

भूपेन्द्र डोंगरियाल