लाजहीन के बीच में,रखता है तू लाज।दुनियादारी क्या कहे,डरता रहा समाज।।भूपेन्द्र डोंगरियाल04/11/2023
लाजहीन के बीच में,रखता है तू लाज।दुनियादारी क्या कहे,डरता रहा समाज।।
भूपेन्द्र डोंगरियाल04/11/2023