इश्क़ में तपता बदन है,
बिछुड़े दिलों की ये कहानी।
प्यासा पपीहा ढूँढता है,
प्यार के दो बूँद पानी।।
ये लौ लगी है जब से देखो,
रात-दिन जलता रहा हूँ।
जग को भूला ख़ुद को बिसरा,
बस मैं तुम्हें जपता रहा हूँ।
समझा रहा हूँ मान जाओ,
फिर न बहुरेगी जवानी।
प्यासा पपीहा ढूँढता है,
प्यार के दो बूँद पानी।।
तुम्हें रूठना हो रूठ लो तुम,
पर अब पिया के घर चलो तुम।
अरमान मेरे बस यही हैं,
है ऋतु बसन्त फूलो-फलो तुम।
कुछ प्यार के किस्से हमारे,
मैं सुनूँ तेरी जुबानी।
प्यासा पपीहा ढूँढता है,
प्यार के दो बूँद पानी।।
उपमा में मेरी हो कमी कुछ,
तुम रूपसी हो अप्सरा हो।
मैं हुनर का हूँ पुजारी,
कोई कनक जैसा तो खरा हो।
भले माँगता हूँ हाथ तेरा,
पर कर्ण जैसा हूँ मैं दानी।
प्यासा पपीहा ढूँढता है,
प्यार के दो बूँद पानी।।
भूपेन्द्र डोंगरियाल
17/02/2021
