आरक्षण मिटा दो,
समाज को बचा लो।
देश को बचा लो,
देश को बना लो।

समाज में छुआछूत,
आरक्षण से पनपा है।
जात अब तक जिन्दा है,
समाज इससे खपा है।

वोट की राजनीति से,
देश को चला लो।
देश को बचा लो,
देश को बना लो।

सोचते हैं आमजन,
बच्चे कहाँ पढ़ाएँ।
अच्छे डॉक्टर से,
मरीज़ को दिखाएँ।

हुनरमन्द चल दिया,
आरक्षण बस गया।
प्रगति के पटल पर,
आरक्षण बच गया।

विकास की सीढ़ी पर,
आरक्षण का नारा है।
वोट की राजनीति से,
बुद्धिमान हारा है।

अभी भी समय है,
होनहार को बचा लो।
देश को बचा लो,
देश को बना लो।

भूपेन्द्र डोंगरियाल