सबके नाम कर दू ऐसे दिल के कोई कागज़ात नही
सर-ए-बज्म में लोग कहे हमारे पास जज्बात नही
चले आते है पासबाँ जैसे किसी की मय्यत हो
जख़्म ही तो है सिर्फ, घटी कोई वारदात नही
रग़बत ही तो अबतक रिश्ते बचाए हुई है
वरना तौहीन सहूँ इतने भी बुरे हालात नही
रिवायत के नाम पर ख़म्याजा कर देते है
आख़िर क्यो बदलते पुराने ख़यालात नही ?
हमसाये रोज आ जाते है शिकायते लेकर
यह घर है मेरा कोई आदालात नही...
- ©® हर्षदा डोंगरे....

