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अजनबी


तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा ।

वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में,हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा ।

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