मैं तुम्हें तब से जानती हूँ
जब तुम खुद को भी नहीं जानते थे,
और अब तुम कहते हो मुझे भूल जाना,
आसान है क्या?
पहले घंटों बातें होती थीं,
अब एक बात करने को घंटों सोचना पड़ता है,
मन के इस शोर में चुप रहना,
आसान है क्या?
मेरी नादानीयाँ ही मुझे सबसे अलग करती थीं,
अब तुम्हें ये बचकानी लगने लगी हैं,
चंद लम्हों में बड़े होना,
आसान है क्या?
प्यार क्या होता है पता भी नहीं था,
तबसे तुमसे प्यार किया है ,
तुम्हें प्यार ना कर पाना,
आसान है क्या?


