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दूरी की मजबूरी

हम और तुम हैं, पास बहुत, फिर हम दोनों में क्यों दूरी है।

सागर की लहरों से मिलती, सरिता की कुछ मजबूरी है।।

हम और तुम हैं पास बहुत, फिर......

आँखों में बस झाँक-झाँक कर, हमने तो कई ख़्वाब सजाए,

मेरी मुस्काने तुम रख लो, अश्कों को हम घर ले आए।

आऊँगा अब

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