एक दीवार के सहारे चल रहा था बरसों से उजाला नहीं देखा जब नींद टूटी तो पाया हर तरफ जानवर ही जानवर है जो बोल सकते थे उन्होंने खाल बदलना सीख लिया था चेहरा बदलना जानते थे सबके पास अपनी अपनी बेड़ियाँ थी और सबके होंठ सिले हुए थे सब जोर जोर से बोल रहे थे ऐसा लग रहा था के सब सो रहे थे ऐसा लगता है सब सो रहे है --- दिवम्ना