
अजीब लत है ज़िंदा रहने की
रोज मर कर भी पूरी नहीं होती
नसों में तड़पती रहती है
नोचती रहती है कानो की झिल्ली को
जैसे की आँखे पर्दों से लगकर चिल्ला रही हो
नाखून धस गए हो जिस्म में
और साथ छोड़ते ही न हो
उंगलियां रेंगती हो पैरों से लगकर
पूरी दुनिया समेट लेना चाहती हो
तब
Read More! Earn More! Learn More!
