आसमाँ के क्षितिज से अनन्त पार ,
सागर की गहराई से गहरा
एक अस्तित्व ,एक पहचान
एक नारी हूं मैं
ब्रह्माण्ड की अनोखी कृति,
समझने वालों के लिए वरदान ,
न समझने वालों के लिए अनसुलझी गुत्थी ,
एक नारी हूं मैं
अपने भाग्य को खुद रचती,
अपनी मुश्किलो से खुद लडने का साहस रखती ,
आत्मविश्वास से भरी,
एक नारी हूं मैं
अत्याचारो ,जुल्मो के खिलाफ कहीं तेज़ तो कहीं ज्वाला
तो कहीं दया ,करूणा का ठंडा साया हूं,
एक नारी हूं मैं
सहनशीलता ,दृढता से परिपूर्ण
एक कोमल हृदय से निपुण ,
एक नारी हूं मैं
संसार का चक्र जिससे चलता ,
उसी चक्र का महत्वपूर्ण मजबूत पहिया हूं,
एक नारी हूं मैं।


