बीत गया है बहुत कुछ
गुजरते वक्त के साथ
अपनी मासूमियत बेच आए
दुनियादारी के बाजार में,
लाख कोशिसे की
हर किसी को खुश रखने की की,
नाकाम हुए तो
अपने लिए सबको छोड़ आए,
सहमा हुआ सा मन
हर किसी के लिए चट्टान बना
आजमाया हर तरीका दिल ने ,
कभी इंसान, तो कभी हैवान बना
न खुद के लबों पर हंसी आयी,
न गैरों को हंसा पाए,
ऐ खुदा! तू ही बता ,
अब और क्या किया जाए
इसलिए मन्नतों का एक दीया
आज तेरे दर पर जला आए।