बंदिशे हैं उस पर सोच की, नजरिए की, मान्यताओं की, चार दिवारी का आवरण संग संग चलता है कितनी भी दूरी  चल ले, एक ना एक दीवार रह ही जाती है, सीमाएं खुलती मिटती नहीं लेकिन वो किसे दोष दे सीमाएं बनाने या उस पर तार बिछाने वालो को, या उसे मारने वालो को, या खुद को की वो एक लड़की है।.....