कैसे उतारू,...
किसी एक परिभाषा में
तुमको ,
जब कि तुम हो भी
और नहीं भी हो।
तुम हो ,
इन किताबों में ,
कविताओं में ,
ग़ज़लों में ,
रचनाओं में।
और तुम नहीं हो,
मुझ में ,
और इस कलुषित समाज में।
प्रेम !!
मैं तुम्हें कैसे उतारू ??????

कैसे उतारू,...
किसी एक परिभाषा में
तुमको ,
जब कि तुम हो भी
और नहीं भी हो।
तुम हो ,
इन किताबों में ,
कविताओं में ,
ग़ज़लों में ,
रचनाओं में।
और तुम नहीं हो,
मुझ में ,
और इस कलुषित समाज में।
प्रेम !!
मैं तुम्हें कैसे उतारू ??????