वातायन- यूके की संस्थापक, रौयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो, लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2000 की सांस्कृतिक अध्यक्षकेंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा पद्मभूषण मोटुरी सत्यनारायण पुरस्कार; दिल्ली, राजस्थान, अंडमान निकोबार, जे.एन.यू-पोर्ट ब्लेयर और असम आदि विश्वविद्यालयों ने सम्मानित, यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष और कथा-यूके की अध्यक्ष रह चुकी, दिव्या माथुर का नाम ‘इक्कीसवीं सदी की प्रेणात्मक महिलाएं’, ‘ऐशियंस हूज़ हू' और विकिपीडिया की सूचियों में भी सम्मलित है। 25 वर्षों तक नेहरु केंद्र-लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के रूप में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए आर्ट्स काउन्सिल औफ़ इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया।
एक पुरस्कृत लेखिका के रूप में, दिव्या के सात कविता-संग्रह, पांच कहानी-संग्रह और एक उपन्यास, शाम भर बातें, जो दिल्ली विश्विद्यालय के बीए-औनर्स पाठ्यक्रम में शामिल है, प्रकाशित हैं। अंग्रेज़ी में पांच कहानी-संग्रहों की सम्पादक, पांच बाल-पुस्तकों की अनुवादक, दिव्या की बहुत सी पुस्तकों पर स्नातकोत्तर शोध हो चुके हैं। आपके नाटकों, फ्यूचर-परफैक्ट, Tête-à-tête एवं ठुल्ला किलब, का सफल मंचन हो चुका है। दूरदर्शन ने आपकी कहानी, सांप सीढी, पर एक टेली-फ़िल्म बनाई है। डा निखिल कौशिक द्वारा निर्मित फिल्म, घर से घर तक का सफ़र: दिव्या माथुर, को भारत के विभिन्न फिल्म-फेस्टिवल्स में शामिल किया जा चुका है।
कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में दिव्या की रचनाएं सम्मलित एवं कृतियों का अध्ययन। इनका उपन्यास 'शाम भर बातें' दिल्ली विश्विद्यालय के प्रावीण्य पाठ्यक्रम में शामिल है।
प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: शाम भर बातें (दिल्ली विश्विद्यालय के प्रावीण्य पाठ्यक्रम में शामिल) कहानी संग्रह: मेड-इन-इंडिया, हिंदी@स्वर्ग.इन, 2050, पंगा, आक्रोश, दिव्या माथुर:प्रवासी पंद्रह कहानियां, और ज़हरमोहरा (उर्दू में);कविता संग्रह: अंतःसलिला, ख़याल तेरा, रेत का लिखा, 11 सितम्बर, चंदन पानी, झूठ, झूठ और झूठ, जीवन हा मृत्यु; बाल कविता संग्र: सिया-सिया। अँग्रेज़ी से/में संपादन: Odyssey Aashaa, Desi-Girls, इक सफ़र साथ-साथ, तनाव (दो खंड) और नेटिव सेंटस: ब्रिटिश-भारतीय कवियों की रचनाएं; अनुवा: पांच बाल-पुस्तकों का काव्यानुवाद। नैशनल फ़िल्म थियेटर के लिए सत्यजीत रे के फ़िल्म रैट्रो और बीबीसी द्वारा निर्मित कैंसर पर बनी एक डाक्युमैंटरी का रूपांतरआक्रोश, औडिस्सी एवं आशा संग्रहों के पेपरबैक संस्करण आ चुके हैं। नेत्रहीनता के विषय पर इनकी रचनाएं ब्रेल-लिपि में प्रकाशित हो चुकी हैं
'नया ज्ञानोदय' द्वारा 'पिछले पचास वर्षो की सर्वश्रेष्ठ कहानियों' और 'सन्डे-इंडियंस' द्वारा हिन्दी की पच्चीस बेहतरीन कहानीकारों में आपको शामिल किया है। बहुत सी भाषाओं में भी अनुदित और प्रकाशित, उनकी कहानियाँ और कविताएं कई महत्वपूर्ण संग्रहों में भी सम्मलित हैं।

