एडम और ईव
दिव्या माथुर
बात ज़रा सी थ; एक झन्नाटेदार थप्पड़ ईव के गाल पर पड़ा।वह संभल नहीं पाई, कुर्सी और मेज़ से टकराती हुई ज़मीन पर जा गिरी। उसका बायां हाथ स्वतः गाल पर चला ग, लगा कि जैसे उसका चेहरा ऊबड़खाबड़ हो गया हो जबाड़े की हड्डियां एक दूसरे पर चढ़ गयी थीं और दर्द के मारे उसका बुरा हाल था उसने उठने की कोशिश कीउसकी आँखों के आगे तारे घूम गए।
सुबह की व्यस्तता में, ईव के हाथ लगने भर से मेज़ पर रखी दूध की खुली बोतल लुढ़क गयी थी। कॉर्न-फ़्लैक्स में एडम दूध डालने ही वाला था कि यह दुर्घटना घट गएडम को एहसास हो गया कि चांटे के लिए यह समय उपयुक्त नहीं था। ईव और रोबिन दोनों के स्कूल जाने का समय था; पड़ोस,स्कूल-बस अथवा स्कूल में उसकी क्रूरता उजागर हो सकती थी। उसे सावधानी बरतनी चाहिए थी; अपने बचाव के लिए उसका दिमाग़ तेज़ी से दौड़ने लग'आइ एम रियली वेरी सॉरी, डार्लिंग,' कहते हुए एडम ने बड़े प्यार से पत्नी को सहारा देकर कुर्सी पर बैठा दिया और अपना सिर ईव के घुटनों पर रख कर उसके क़दमों में बैठ गयाऐसी परिस्थितियों में एडम के अतिरिक्त, स्वयं अपने प्रति, ईव की वितृष्णा चरम सीमा पर होती है क्योंकि वह जानती है कि एडम उसकी कमज़ोरी का फ़ायदा उठा रहा हैफिर उसको बेवकूफ़ बना रहा है। अपने भ, भीरुता और कमज़ोरी पर शर्मिन्दा होने के सिवा वह कुछ नहीं कर पाती। पर बस अब और नहीं, जो होगा देखा जाएगा। अधिक से अधिक वह उसकी हत्या ही तो कर सकता है। वह ज़िंदा है तो केवल अपने इकलौते बेटे रॉबिन के लिए। उसे देखती है तो वह फ़ीनिक्स की मानिंद फ-फिर ज़िंदा हो उठती है। प्रतिवाद के लिए ईव ने अपने भिंचे हुए दांतों को ज़रा सा खोला भर था कि मुंह में भरा ख़ून यकायक फूट पड़ा, जो एडम के हाथों और कपड़ों पर भी गिरा।'फ़क्किंग है,' कहता हुआ एडम ग़ुसलख़ाने की ओर लपका।ईव किचन-टीशुज़ से अपना चेहरा साफ़ करने लगी। खून से लथपथ टीशूज़ की लुगदी बन गयी थइतना खून! वह अचेत हो गयी। होश आया तो वह अपने बिस्तर पर थी, एडम नदारद था। वह उठ कर सीधे गुसलख़ाने में पहुँची,शीशे में अपना सूजा हुआ चेहरा देखा तो उसे एक बार फिर चक्कर आ गया; ऐसी हालत में वह स्कूल कैसे जा पाएगी? चेहरे पर पड़े नील-पीले दाग़ भारी मेक-अप के नीचे भी नहीं छिपेंगे;इस घाव के लिए कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता था। भीषण पाठ्यक्रम के चलते अध्यापकों के लिए छुट्टी लेना लगभग अपराध माना जाता है। उनके भीषण परिश्रम को नज़रन्दाज़ करते हुए लोग केवल उनकी छुट्टियों से रश्क़ करते ह रॉबिन के अलावा, स्कूल ही तो उसका सहारा है, जहां जाकर वह अपने सारे दुःख-दर्द भूल जाती है; कहीं उसे स्कूल से निकाल दिया गया तो?
खटपट सुनकर एडम ग़ुसलख़ाने में आ धमका,डार्लिंग, आर यू ऑल राइट नाउ?' एडम ने बड़े प्रेम और चिंतित स्वर में पूछा। 'लीव मी अलोन,' दर्द और ग़ुस्स की वजह से ईव ठीक से बोल नहीं पाई।
'आई सेड, आई एम सॉरी, 'एडम ने उसे झिड़का;यही क्या कम था कि उसने माफ़ी मांग ली थी। 'सॉरी' कह देने से क्या उसका दर्द मिट जाएगा, उसके टूटे हुए दांत जुड़ जाएंग? उसके अनादर और अपमान का क्या? अपने सिवा एडम को किसी से हमदर्दी नहीं है। कभी-कभी वह सोचती है कि क्या परिस्थिवश एक दिन वह रॉबिन को भी दाव पर लगा सकता है?
इस वक्त तो एडम बात को दबाना चाहता था इसलिए वह दनदनाता हुआ रॉबिन के कमरे में चला गया।
'मम्मी इज़ मेकिंग ऐ सीन अगेन पर तुम तो मेरे समझदार बेटे हो, तुम किसी से कुछ नहीं कहना, ओके?' ईव तो जानती ही थी कि वह रॉबिन को बहला-फुसला कर चुप रहने को कहेगा।
'व्हाट हैप्पंड टू मम्मी?' रॉबिन ने दृढ़ता से पूछा।'व्हाट हैप्पेन्स इन एव्री फ़ैमिल, माई लिटिल मैन। कोई पूछे तो कह देना कि मम्मी बाथरूम में फिसल गयी थी, अब जल्दी से तैयार हो जाओ, शाम को हम मैक्डोनाल्ड चलेंगे।'
ईव के न चाहने पर भी एडम आज रात को उसके साथ भी ज़ोर-ज़बरदस्ती करेगऔर वह कसमसा कर रह जाएगी कि कहीं रॉबिन न सुन ले। एडम सोचता है कि सैक्स से औरत को पराभूत किया जा सकता है। ऐसी रातों को ईव अतिरिक्त विरक्त रहती है, उसके मृतप्राय शरीर पर चपेटें मार-मार कर जगाने के प्रयत्न में विफल एडम झुंझला कर शराब पीने बैठ जाता है या घर से बाहर चला जाता है। ईव नहीं चाहती कि वह लौटे। हर दिन दर्जनों दुर्घटनाए घटती हैं, लोग ट्रेन और बसों के नीचे दब कर मर जाते हैं, हृदयाघात से न जाने कितने युवा लोग स्वर्ग सिधार जाते हैं पर बदकिस्मत ईव के घर ऐसा कुछ नहीं होने वाला। जाने किन बुरे कर्मों की उसे सज़ा मिल रही है।
विवाह के पहले ही हफ़्ते में ग़ुसलख़ाने में अधिक समय लगाने की वजह से एडम ने जब उसे चांटा मारा था तो वह सक़ते में आ गयी थी। तब उसे अपनी माँ की याद बड़ी शिद्दत के साथ ; लगा कि उसी वक्त भाग कर माँ की गोद में छिप कर फफक फफक कर रोकर उनसे अपनी व्यथा को बांटे पर वह हिम्मत नहीं जुटा पाई। प्रेम-विवाह के बाद मायका छूट चुका था; पिता अपनी लाडली और इकलौती बेटी की शक़्ल भी देखने को तैयार नहीं थे। यह घर छोड़ा तो वह कहाँ सिर छिपाएगी?आई थी ा ी
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