दूर खड़ी मुस्कुरा रही,
मुझे देख तेरे बिना कितना मैं घबरा रही,
ज्यादा दिन नहीं हुए तुझे गए हुए ,
पर फिर भी तेरी याद आ रही,
हर पल इंतजार कर रही हूं तेरा,
कब तुझे सब से छुटकारा मिले,
और मैं लगू कब तेरे गले,
मां तेरी गाली भी प्यारी थी,
खिलाती थी तब और अब याद दिलाती है,
हां वही से आशीर्वाद बरसा रही है तू,
मगर मुझे तू चाहिए,
घर में अकेली लग रही हूं मैं,
तेरा एहसास चाहिए, अगर तू पास चाहिए,
मुझे तू चाहिए।।


