एक अपना है जो सपना है क्या लिखा है रब किस्मत में "जीवन भर तपना है" लब पर जब खुशहाली है तो आंखों में बदहाली है भरी भारी महफ़िल है जब तो कुछ क्यों खाली खाली है दिल साधु अब करेगा क्या उसके माला को जपना है क्या लिखा है रब किस्मत मैं "जीवन भर तपना है " जब हर उड़ान को छूना है तो एक सपना क्यों सूना है अब कैसे हंसे तरक़्क़ी पर आँसू अकार में दूना है हर जगह हाँ हाँ होकर भी एक जगह क्यों ना है क्या लिखा है रब किस्मत मैं "जीवन भर तपना है " लाख दीपक जले जीवन में फिर भी अंधेरा दिल के आंगन में जो मिलकर भी मिला नही वो घुला हुआ है तन,मन में अब साँसों को,अहसासों को , इंतज़ार मैं खपना है क्या लिखा है रब किस्मत में "जीवन भर तपना है" एक अपना है जो सपना है