वह मेरा समय था

मुझे याद आता है 


वो मिट्टी की खुशबू

वो तालाब का पानी


वो महक आम के बागान कि

वो चहक भोर के पंछियो कि


वो मां के हाथ का खाना

वो पिता जी के साथ चौक पे जाना


वो मेरे भेंस को मिलो घास चराना

वो रेडियो ठीक करवाने शहर जाना


वो मेरे खेत में बांस का मचान

वो बागान में सांप को देख अटकती जान


वो कच्चे दूध का स्वाद

वो खाट पे बैठे बूढों का आपस में विवाद


वो लालटेन लिए रात को भोज में जाना

वो केले के पत्ते पे दावत उड़ाना


जहां देखता था 

वहां बस प्रेम ही दिखता था


जब याद करता हूँ

बहुत अच्छा लगता है


वापिस नहीं जा सकता, यह सोच

कलेजा भी दहल जाता है


वह मेरा समय था

मुझे याद आता है ।



~दिवाकर वर्मा




मेरे पिताजी के लिए