दिन में हथियार डाल कर
रात में जंग लड़ता हूँ
मैं अपनी परछाई का पीछा करता हूँ।
शब्दों को जोड़ कर
गैरों से बातें करता हूँ
मैं अपनी परछाई का पीछा करता हूँ।
सब कुछ याद कर
भूल जाने को मारता हूँ
मैं अपनी परछाई का पीछा करता हूँ।
नम आँखों से ही सही
पर ज़ोर ज़ोर से हँसता हूँ
मैं अपनी परछाई का पीछा करता हूँ।
सड़कों पर बैठ कर
मिलों का सफ़र तय करता हूँ
मैं अपनी परछाई का पीछा करता हूँ।