जीवन मे दर्द है
दुःख है
मैंने कभी पढ़ लिया था
अनुभव न किया
जब दर्द हुआ
हृदय ने उसे छुआ
जो कभी ना हुआ
तो स्मृति और हंसी
विस्मित हो गए
थेओरी और प्रैक्टिकल
अलग अलग सो गए
दोनों ने तलाक कर लिया था ।
उपमा देना आसान है
किसी को सुन लेना आसान है,
सुनी सुनाई कह देना आसान है
पर दिल मे चुभा उस कांटे का क्या
जो दबे दबे ..चुपचाप से रहे
कानों में सरगोशी करे
श्रोता तो उसे कभी ना सुने
पर लिखनेवाले दिनरात पढ़े
आगे खाई और पीछे कुवाँ था !
अब क्या बचा सब कह तो दिया
पीड़ा के तल में बबंडर छुपा था
अल्हड़पन में मैं हंसे जा रहा था
जिसे अनुभव न किया
जब दर्द हुआ
हृदय ने उसे छुआ
तो चीत्कार मारकर रो पड़ा था ।
मैं जो पढ़ा था वह खोखली थी
अनुभव जो किया वह असली है
बांकी पढ़ने लिखने का काम नकली है ।
~©दिशव


