यादें तो बस यादें हैं,कभी हँसाती हैं , कभी रुलाती हैं।
यादें तो बस यादें हैं, यादों से क्या डरना है, बस इतना सा ही करना है ,
अच्छी यादों को संजोना है ओर बुरी यादों से कुछ सीख लेना है।
यादें तो बस यादें हैं, किताब की तरह लिखी जाती हैं।
बचपन की यादें, जवानी की यादें, सफलता,असफलता की यादें,
बुढ़ापे की यादें ओर बन गयी हमारी ज़िंदगी की यादों की किताब।
यादें तो बस यादें हैं , हर याद में कुछ राज़ है।
अच्छी यादों का राज़ है हमारा अच्छा वक़्त ओर बुरी यादों का राज़ है हमारा बुरा वक़्त।
बस अच्छे , बुरे वक़्त की कहानी ही सुनाती है हमारी यादों की किताब।
यादें तो बस यादें हैं , कुछ खटी हैं , कुछ मीठी हैं।ज़्यादा कुछ नहीं सोचना है,
बस इतना सा ही करना है कि हर याद पे मुस्कुरा देना है ओर ज़िंदगी को आसान बना लेना है।