ज़िन्दगी है तो जंग भी है
किसी का गम तो किसी की खुशी भी है
किसी की फकीरी तो किसी की राजशाही भी है
ये उमस भरी गर्मी के दिन ये ठंडी चांदनी रात
ये कोयल की कूक ये कौवे की काक
ये गाड़ियों का शोर ये चौराहे की चर्चा
ज़िन्दगी है तो रिश्ते भी है
पिता की डांट तो मां का दुलार भी है
किसी की दोस्ती तो किसी का प्यार भी है
गंगा की पावन धारा जमुना का निर्मल पानी
गांव की सुंदर काया शहरों की गन्दी नाली
गुल्ली डंडे का खेल सरपट दौड़ती रेल
मिलेगा सब इस जीवन में और कहीं नहीं
ज़िन्दगी है चार दी की और कुछ नहीं
है आज वक़्त खराब तो कल फिर आएगा
नया सवेरा ज़िन्दगी को नई राह दिखलायेगा।


