मुझको तन्हा छोड़ के जाने वाली तुम

सात जनम तक साथ निभाने वाली तुम!


बोलो! किसकी बातों में आ बैठी हो

मेरी बातों में ना आने वाली तुम


जाते जाते आँखों में ये सूखापन

मिलने पर भी अश्क़ बहाने वाली तुम


मैं तन्हाई ले, फिरता हूँ जंगल में

सहराओं में फूल खिलाने वाली तुम


तुम थीं तो इस दुनिया को सब हासिल था

दुनिया को वीरान बनाने वाली तुम


- दीपक विकल