किस से रिश्ता रखु जिस तरफ देखू जिस तरफ जाऊँ शैतान ही मिलते है

इस मतलब की दुनिया में ईमानदार तो सिर्फ ढूंढने से मिलते हैं

मन भर गया है स्वार्थी रिश्तो से मेरा अब तो सच्चा रिश्ता सिर्फ परिवार और परमात्मा और सबसे मित्रों से हैं

अधिकतर लोग बन गए हैं पत्थर के जिनमें भाव तो है लेकिन प्रेम के प्राण नहीं कितना भी समझा लो पत्थर लोगों को लेकिन पत्थर को कभी समझना नहीं आता

आज की दुनिया में एक पत्थर को देखकर दूसरा जिंदा इंसान भी पत्थर बन जाता है कमाल का वक्त चल रहा है

संभल जाओ मेरे यारों कुछ नहीं रखा है इस पत्थर की दुनिया में नेक बनो एक बनो सच्चे लोग इस दुनिया में हीरे की तरह जो बहुत मुश्किल से मिलते हैं ,पत्थर तो हर कहीं पर पड़े मिलते हैं