आप यहाँ किस उजाले की चाहत करते हैं यहाँ तो अंधेरें रौशनी की हिफाजत करते हैं   आपकी आवाज़ें नहीं पहुँचेगी उनके कानों तक खामखाँ बोलकर आप आफत करते हैं   जिनकी दुआएँ कबूल होना थी हो चुकी आप अब तलक उस चेहरे की इबादत करते हैं   आपने ये कैसे सोच लिया कि बगावत कर लेंगे यहाँ वही जीते हैं जो उनकी खुशामद करते हैं