जिसके खेत की मिटटी में उपजते आपके सियासी पकवान है

आपकी दहलीज पे खड़ा ये वही किसान है

 

आप कहते है पाँच साल में जिसकी तस्वीर बदल देंगे

सड़कों पर रोता बिलखता ये वही हिंदुस्तान है

 

बोल बोल कर आपने आधी दुनिया जीत ली

आपके इस लहजे के तो हम कदरदान है

 

आग सीने में सदियों से जल रही है

आप कहते हैं कि जरासी बात पे क्यों घमासान है

सुधर जाइये अब भी वक्त है

वरना आप भी चंद दिनों के मेहमान है