हे लोकतंत्र के चौथे खम्भे
बात एक बतानी है
झूठा है ये बजट केंद्र का
रपट यही लिखानी है
राशन महंगा घर महंगा
महंगी मोटरकार है
क्या करेंगे इनका साथी
जब नहीं कोई रोजगार है
रंक हुई जनता देशबकी
वित्त मंत्री बनी रानी है
झूठा है ये बजट केंद्र का
रपट यही लिखानी है.....
टैक्सों में राहत नहीं
व्यपार जगत को घाटा है
इलेक्ट्रॉनिक आइटम हुए महंगे
सस्ता पर मोबाइल डाटा है
ये तो सिर्फ बातें करते
मन की नहीं जानी है
झूठा है ये बजट केंद्र का
रपट यही लिखानी है....
दिल पर हाथ रखना साथी
ना हमको बहकना रे
क्या है ये जन हित बजट
सच हमको बतलाना रे
हम तो चलो मूर्ख ठहरे
पर तू तो साथी ज्ञानी है
झूठा है ये बजट केंद्र का
रपट यही लिखानी है....
दिन-ऐश


