तोड़ के वादेथे जो तय शुदा

किसी और से हो तुम शादीशुदा


तुम चली गयी जो होकर शर्मिन्दा

दिल मे रही फिर भी तो ज़िन्दा


तुम बिन जीना है बहुत पेचीदा

साथ सिर्फ़ तेरी कुछ यादें चुनिंदा


साँसें चल रही पर जैसे हूँ मैं मुर्दा

हालत मेरी है अब यही मौजूदा


जी रहा हूँ अब यदा कदा

थोड़ा थोड़ा गुम शुदा


मरते दम तक यूँही मुझे रहना होगा

घुट घुट कर जीना या मरना होगा


~दिनेश चौधरी ©️