नारी तेरे कितने है रूप ?
कभी सुनहरी छाँव कहलाती कभी कड़कतीं जैसे धूप
कभी यकायक बोल उठी, कभी रही तू मौन और चूप
कभी लगी तू मोहिनी, कभी रणचंडी और भयरूप
कभी तू भक्ति लीन मीरा , कभी शक्ति आदिरूप
देवों को अमरत्व देती, तू अवतरित स्वयं सुरभूप
विस्मयकारी तेरी लगन, शक्तियाँ तेरी बहुत अनूप
नारी तू है नारायणी, चाहे तेरा जो हो रूप
कभी सुनहरी छाँव कहलाती कभी कड़कतीं जैसे धूप
नारी तू है नारायणी, चाहे तेरा जो हो रूप !!
~दिनेश चौधरी ©️


