व्यर्थ है
ख़रीदने का प्रयास उसको
उसने
पदवियों को लौटाया है
भक्ति में रमाया है
फ़क़ीरी को गले लगाया है
वह
क्रांति को गढ़ता है
पुष्प सा महकता है
देश की माटी में लिपटा है
और भावों को लिखता है
साधारण #लेखक है
आशीष पर झुकता है
स्नेह से पिला दो तो
एक प्याली चाय पर बिकता है
#writers
~दिनेश चौधरी ©️

