उन्मुक्त मन

खिलती हँसी

उपहार में खनकती पायल से

दिल जोड़ गया


सरहद के बुलावे पर

निस्तेज मुख

विस्फरित नयन

मन मोड़ गया


फ़र्ज़ के बंधन से

पायल के गुंगरु 

मोह के धागे

सब तोड़ गया


तिरंगे में लौटा 

हंसता मुस्कुराता

और हमेशा के लिए

पायल को मेरी 

निःशब्द छोड़ गया


~दिनेश चौधरी ©️