क्या कहूँ , मेरे दोस्त तुमसे

तुम मेरे लिए क्या हो ?


मेरे गीतों का राग तुम हो

जीवन का अनुराग तुम हो

दिल से दिल का संवाद तुम हो

लड़कपन का उन्माद तुम हो


हौसलों की उड़ान तुम हो

दरियादिली की पहचान तुम हो

साथ देखे जो अरमान तुम हो

चेहरे पर बिखरी वो मुस्कान तुम हो


तुम राम हो श्याम हो

हर पल एक आराम हो

तुम चाहे भोर हो शाम हो

हरदम जो आए कामहो


तुम अटूट हिस्सा हो

दोहराऊँ जिसको वो क़िस्सा हो

तुम स्नेह का पड़ाव हो

टूटे ना कभीवो जुड़ाव हो


क्या कहूँ , मेरे दोस्त तुमसे

तुम मेरे लिए क्या हो ?


तुम जीवन का उत्सव हो !!

तुम महोत्सव हो !!


~दिनेश चौधरी ©️