जगमग दीप

हो झिलमिल तारे

मिलजुल के मनाये

हम सारे के सारे


ईश्वर को ध्याये

आँखो को मींचे

नफ़रतें मिटाये

रिश्तों को सींचे


घर हो रोशन

और चेहरे मुस्काए

भेद मिटा कर सारे

सबको गले लगाये


सहयोग बढ़ाये

दीप से दीप जलाये

संकल्प ले

देश आत्मनिर्भर बनाये


दिवाली, इस बरस कुछ इस तरह मनाये!


~दिनेश चौधरी ©️