युद्ध के मैदान में
उत्तप्त सूर्य तेज हो
खेत व खलियान में
कृषक मुख मयूख हो
कोमल किरण आगमन से
प्रभात पक्षी-वृंद हो
शक्ति क्षीण हड्डियों में
नव ऊर्जा संचार हो
नभतल योजित शाला में
ज्ञान गंगा विस्तार हो
तमस हरण हवन में
सूर्य प्रकाश उद्दिप्त हो
मानुष उत्कांत साक्षी तुम
धूप का प्रभाव हो
तुम, धूप का प्रभाव हो !
~दिनेश चौधरी ©️

