ईश्वरीय ध्यान में लीनकृष्ण प्रेम में आसक्त है

आदियोगी का उपासकव्यर्थ प्रपंचों से विरक्त हैं

उपहास से अविचलितपरिभाषित वही भक्त है


मर्यादित जीवन दर्शन से पूरी तरह आश्वस्त है

राम से रहीम तक,  हर रूप में विश्वस्त है

सनातन संस्कृति का अनुयायीमानवता में व्यस्त है

विश्व शांति का परिचायकप्रकृति निष्ठा में मस्त है

उपहास से अविचलितपरिभाषित वही भक्त है


परिवारों को सींचती , कई रूपों में वर्णित है

बाधाओं को लांघती , वह नारायणी गर्वित है

शिक्षा प्रसार करतागाँव गाँव जो विस्तृत है

लगन निष्ठा से सीखताविध्यार्थी अपेक्षाकृत है

उपहास से अविचलितपरिभाषित वही भक्त है


भारत का वह अन्नदाताबहुत थोड़े में संतुष्ट है

पर्वतों को नापतापरिश्रमी प्रशस्त है

विज्ञान के ज्ञान सेविकास प्रयोग सख्त है

सीमाओं पर शीश कटातापराक्रमी रक्त है

उपहास से अविचलितपरिभाषित वही भक्त है


पूर्ण निष्ठा,लगन का परिचय , परिभाषित वही भक्त है।



~दिनेश चौधरी ©️