बरस भर नहीं देखा,माँ की आँख भर आयी है

बाबा के चेहरे पर फिर मीठी मुस्कान छायी है

बूढ़ी हो चुकी हड्डियों में एक नयी जान आयी है

दादी ने उसकी पसंदीदा खीर बनायी है

और

दादू ने तो आज कुर्सी बरामदे में लगाई है


संग अपने अपार वो ख़ुशियाँ,त्योहार लायी है

#बेटी नातिन संग कुछ दिन मायके आयी है


भाभी ने शगुन की नयी साड़ी मँगवायी है

छोटी के लियेटपरी से ईमली गोली लायी है

भाई ने अपनी बुल्लेट फिर से चमकायी है

पहली दोस्त को गुमाने की ख़्वाहिश सजायी है


संग अपने वो अपार ख़ुशियाँ,त्योहार लायी है

#बहन भानजी संग कुछ दिन मायके आयी है


~दिनेश चौधरी