बेटी आज तुम लो एक प्रण,

नहीं समझो अपने को साधारण

कठोर इतना तुम करो प्रशिक्षण

साधु भेष कभी जो आए रावण

तुम रच दो एक नया रामायण


#बेटी आज तुम लो एक प्रण 

बढ़े दुशासन जो करने हरण

नहीं राहो प्रतीक्षित, मोहन शरण

बनो काली, हैवान जिसके पड़े चरण

मिला दो हैवानियत को कण कण


बेटी आज तुम लो एक प्रण 

बेटी आज तुम लो एक प्रण !!


~दिनेश चौधरी ©️