तुम कौन हो? मेरे गीतों का राग या मेरी ग़ज़लों की आवाज़ शब्दों में छिपा मेरा बेइन्तेहाँ प्यार मेरी आँखों की प्यास मेरे खामोश लबों का इंतज़ार तुम कौन हो?   ना जाने कौन कौन इन शब्दों को, आईना बनाता होगा कौन इनमे अपने ख्वाब सजाता होगा और मैं बेखबर बस तुझको ही सोच कर अपने दिल के एहसास यूँ कागज़ पर उतार ढूंढ़ती हूँ तुम्हे इस पार तुम कौन हो?