अजनबी तो नहीं कोई अपना ही है वो न जाने क्यों फिर अनजानी है बातें   कहना भी है, सुनने की चाहत भी न जाने क्यों फिर खामोश है सांसें   कोई वादा नहीं है एक आस है बस न जाने क्यों फिर इन इंतज़ार में हैं मेरी आँखें   कोई रिश्ता नहीं एक एहसास ही तो है न जाने क्यों फिर उसके 'क्यों' का जवाब नहीं मेरी बातें....