कभी पास होकर भी दूर थे तुम आज दूर होकर भी बहुत करीब हो तुम ज़िन्दगी का सफर, कभी ख़ुशी कभी ग़म हर सफर हर पल, साथ थे हम   साथी कहलो, दोस्त कह लो जब से जाना मेने इन्हे बहुत मिले साथ देनेवाले पर दिल ने माना सिर्फ तुम्हे   अच्छा बुरा हर वक़्त देखा कभी मैं नाराज़, कभी तुम गुस्सा कहा नहीं ज्यादा कुछ कभी जैसे कहने को कुछ था ही नहीं बिन कहे सब समझ ले जो मन ऐसे दोस्तों की कहानी हैं हम   प्यार करके भी जताया नहीं फिक्र होके भी बताया नहीं ख़ामोशी का रिश्ता है हमारा बेनाम सही, बदनाम नहीं   बेसब्री से इंतज़ार है तुम्हारा दिल कहता है तुमसे ढेरों बातें करुँगी हहहहह , जानते हो तुम भी, आओगे जब सामने बेज़ुबान होके चुप में रहूंगी   खुश है मन यह सोच के छूटेगा कभी ये प्यार नहीं पास नहीं तो दूर ही सही प्यार दिलों में रहेगा यही.....