(तीन दीवाने ) ~ दिलीप सिसोदिया (जैतारण)


(शहीद भगत सिंह ,शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव )


वो दीवानों में शुमार हो गए यारों 

वतन के लिए सब कुछ छोड़ गए यारों 

हँसती-खिलती ज़िन्दगी को मौत के रस्ते मोड़ गए, 

हँसती-खिलती ज़िन्दगी को मौत के रस्ते मोड़ गए।

वतन की दीवानगी में क्या कर गए यारों ,

वतन की दीवानगी में क्या कर गए यारों ।

सुनना ज़रा 

वतन से मोहब्बत इतनी थी कि अपने चाहने वालों को भूल गए 

शहादत तो मंजिल थी उनकी 

जो हँसते हँसते फांसी के फंदो से झूल गए 

देशभक्ति की मिसाल तो देखो ज़रा 

देशभक्ति की मिसाल तो देखो ज़रा

कि

राष्ट्र की आज़ादी के लिए इस कदर आज़ाद हुए 

कुर्बान कर अपनी जान को देश को आबाद कर गए

देश को आबाद कर गए

 ✍~ दिलीप सिसोदिया (जैतारण)

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