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प्यार और भरोसे की नज़्म

तुम अशर्फियाँ इकट्ठे कर लो,

दुनियाँ के सारे शौक पूरे कर लो,

जब सब कुछ हासिल हो जाये,

तो फ़िर, चाँद, तारे,

और ये सारी क़ायनात भी,

अपनी झोली में भर लो,

और मुझे छोड़ दो उन गलियों में,

जहाँ मकाँ जले,

उम्मीदें टूटीं, घ

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