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सितम


जिदंगी से कुछ इस तरह रूबरू हुए वो हम़़ सताते रहे हम खामोशी से उन्हें परखते रहे.... यही कहा खुद से कि कोई बद्दुआ निकले इस मुख से क्योंकि सितम ढहाने वाला भी अपना है..

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