,ना जाने कितनी बार गिरे हैं न जाने कितनी बार उठे हैं.. हर बार खुद से यही कहा अबकी बार हम संभलकर चलेंगे....
छोटी सी चीज पर नाखुशी मनाएंगे
हार मिलने पर ना मलाल करेंगे
गिरते संभलते अब तो सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे
शिखर पर पहुंचकर यह तो झंडा लहराएंगे……


,ना जाने कितनी बार गिरे हैं न जाने कितनी बार उठे हैं.. हर बार खुद से यही कहा अबकी बार हम संभलकर चलेंगे....
छोटी सी चीज पर नाखुशी मनाएंगे
हार मिलने पर ना मलाल करेंगे
गिरते संभलते अब तो सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे
शिखर पर पहुंचकर यह तो झंडा लहराएंगे……