वक्त यूं ही बीत गया और हमारे सपने ज्यों के त्यों पड़े हैं उम्मीद लगाए जाने किस से बैठे हैं...
बहुत सोचा कि छोड़ दे पर क्या करें
रोज सवेरे सूरज की पहली किरण दस्तक देती है
और कहती है.....
इंतजार कर कर्म करने के लिए तैयार रह
साहस जुटा
एक न एक दिन तेरे सपने दरवाजा खटखटाएंगे
तू दरवाजा खोलने के लिए तैयार रह....